श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  3.312.32-33h 
एवमुक्तस्तत: पार्थ: सव्यसाची धनंजय:॥ ३२॥
अवज्ञायैव तां वाचं पीत्वैव निपपात ह।
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर कुन्तीपुत्र सव्यसाची धनंजय उनकी बात अनसुनी करके जल पीने लगा और पीते ही वह अचेत हो गया ॥32 1/2॥
 
On his saying this, Kunti's son Savyasachi Dhananjay disregarded his words and started drinking water and immediately after drinking he fell unconscious. ॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)