Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.312.31-32h: यक्ष ने कहा- पार्थ! इस प्रकार जीवों पर आक्रमण करने से क्या लाभ? पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, फिर जल पियो। यदि तुम प्रश्नों का उत्तर दिए बिना यहाँ का जल पी लोगे, तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे। | mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यक्ष उवाच
किं विघातेन ते पार्थ प्रश्नानुक्त्वा तत: पिब॥ ३१॥
अनुक्त्वा च पिबन् प्रश्नान् पीत्वैव न भविष्यसि।
अनुवाद
यक्ष ने कहा- पार्थ! इस प्रकार जीवों पर आक्रमण करने से क्या लाभ? पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, फिर जल पियो। यदि तुम प्रश्नों का उत्तर दिए बिना यहाँ का जल पी लोगे, तो तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो जाओगे।
Yaksha said- Parth! What is the use of attacking creatures like this? First answer my questions, then drink the water. If you drink the water here without answering the questions, you will die immediately.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥