vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना
»
श्लोक 25
श्लोक
3.312.25
नापश्यत् तत्र किञ्चित् स भूतमस्मिन् महावने।
सव्यसाची तत: श्रान्त: पानीयं सोऽभ्यधावत॥ २५॥
अनुवाद
जब उस विशाल वन में कोई भी जंगली पशु न दिखा, तब अर्जुन थके हुए तथा भक्ति से परिपूर्ण होकर जल की ओर दौड़े।
When he did not see any wild animal in that vast forest, Arjuna, tired and full of devotion, ran towards the water. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×