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mahabharat 3.312.25: जब उस विशाल वन में कोई भी जंगली पशु न दिखा, तब अर्जुन थके हुए तथा भक्ति से परिपूर्ण होकर जल की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.312.25 
नापश्यत् तत्र किञ्चित् स भूतमस्मिन् महावने।
सव्यसाची तत: श्रान्त: पानीयं सोऽभ्यधावत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब उस विशाल वन में कोई भी जंगली पशु न दिखा, तब अर्जुन थके हुए तथा भक्ति से परिपूर्ण होकर जल की ओर दौड़े।
 
When he did not see any wild animal in that vast forest, Arjuna, tired and full of devotion, ran towards the water. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)