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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना
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श्लोक 22
श्लोक
3.312.22
एवमुक्तो गुडाकेश: प्रगृह्य सशरं धनु:।
आमुक्तखड्गो मेधावी तत् सर: प्रत्यपद्यत॥ २२॥
अनुवाद
युधिष्ठिर के ऐसा कहने पर निद्रा को जीतने वाले बुद्धिमान अर्जुन धनुष, बाण और तलवार लेकर सरोवर के तट पर गये।
Upon Yudhishthira saying this, the wise Arjuna, who had conquered sleep, went to the bank of the lake with his bow, arrow and sword.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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