श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.312.2 
भीम उवाच
प्रातिकाम्यनयत् कृष्णां सभायां प्रेष्यवत् तदा।
न मया निहतस्तत्र तेन प्राप्ता: स्म संशयम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - जब प्रातिकामी के स्थान पर दूत बनकर गए दु:शासन ने द्रौपदी को दासी की भाँति बलपूर्वक कौरवों की सभा में घसीटा, उस समय मैंने उसे नहीं मारा; इसी कारण हम लोग ऐसे दुविधा में पड़े हैं॥2॥
 
Bhimasena said - When Dushasan, who had gone as a messenger in place of Pratikami, forcibly dragged Draupadi into the assembly of the Kauravas like a maid, I did not kill him at that time; because of this we are in such a dilemma.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)