श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.312.15 
भ्राता हि चिरयातो न: सहदेव तवाग्रज:।
तथैवानय सोदर्यं पानीयं च त्वमानय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘सहदेव! हमारे छोटे भाई और तुम्हारे बड़े भाई नकुल को यहाँ से गए हुए बहुत देर हो गई है। तुम जाकर अपने भाई को बुला लाओ और जल भी ले आओ।’॥15॥
 
‘Sahdev! It is quite late since our younger brother and your elder brother Nakul left from here. You go and call your brother and also bring water.’॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)