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mahabharat 3.312.14: जब नकुल के लौटने में बहुत विलम्ब हो गया, तब कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने अपने शत्रु को मारने वाले वीर भाई सहदेव से कहा- 14॥   |   mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.312.14 
चिरायमाणे नकुले कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
अब्रवीद् भ्रातरं वीरं सहदेवमरिंदमम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब नकुल के लौटने में बहुत विलम्ब हो गया, तब कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने अपने शत्रु को मारने वाले वीर भाई सहदेव से कहा- 14॥
 
When there was a lot of delay in Nakula's return, then Kuntinandan Yudhishthir said to his brave brother Sahadeva who killed his enemy - 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)