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mahabharat 3.312.13: नकुल की प्यास बहुत बढ़ गई थी। यक्ष की बात अनसुनी करके उन्होंने वहीं ठंडा जल पी लिया। पीते ही वे अचेत हो गए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.312.13 
अनादृत्य तु तद् वाक्यं नकुल: सुपिपासित:।
अपिबच्छीतलं तोयं पीत्वा च निपपात ह॥ १३॥
 
 
अनुवाद
नकुल की प्यास बहुत बढ़ गई थी। यक्ष की बात अनसुनी करके उन्होंने वहीं ठंडा जल पी लिया। पीते ही वे अचेत हो गए॥13॥
 
Nakul's thirst had increased a lot. Ignoring the words of the Yaksha, he drank the cold water there. As soon as he drank it, he fell unconscious.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)