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mahabharat 3.312.11: सारसों से घिरे जलाशय का स्वच्छ जल देखकर नकुल की उसे पीने की इच्छा हुई। तभी उन्हें आकाश से एक स्पष्ट आवाज सुनाई दी।   |   mahabharat अध्याय 3.312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.312.11 
स दृष्ट्वा विमलं तोयं सारसै: परिवारितम्।
पातुकामस्ततो वाचमन्तरिक्षात् स शुश्रुवे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सारसों से घिरे जलाशय का स्वच्छ जल देखकर नकुल की उसे पीने की इच्छा हुई। तभी उन्हें आकाश से एक स्पष्ट आवाज सुनाई दी।
 
Seeing the clear water of the reservoir surrounded by cranes, Nakul desired to drink it. Just then he heard a clear voice from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)