श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 312: पानी लानेके लिये गये हुए नकुल आदि चार भाइयोंका सरोवरके तटपर अचेत होकर गिरना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.312.10 
नकुलस्तु तथेत्युक्त्वा भ्रातुर्ज्येष्ठस्य शासनात्।
प्राद्रवद् यत्र पानीयं शीघ्रं चैवान्वपद्यत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'बहुत अच्छा' कहकर नकुल अपने बड़े भाई की आज्ञा पाकर शीघ्रतापूर्वक उस स्थान पर पहुँचे जहाँ जलाशय था॥10॥
 
Saying 'Very good', Nakula hurried on his elder brother's orders and immediately reached the place where the reservoir was.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)