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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना
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श्लोक 9
श्लोक
3.311.9
तदादाय गतो राजंस्त्वरमाणो महामृग:।
आश्रमान्तरित: शीघ्रं प्लवमानो महाजव:॥ ९॥
अनुवाद
हे राजन! वह महामृग उन लकड़ियों को लेकर बड़ी तेजी से भागा और बड़ी तेजी से दौड़ता हुआ आश्रम से लुप्त हो गया।
O King! Taking those sticks that great deer fled very hastily and galloping at great speed soon disappeared from the hermitage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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