श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.311.7 
तस्मिन् प्रतिवसन्तस्ते यत् प्रापु: कुरुसत्तमा:।
वने क्लेशं सुखोदर्कं तत् प्रवक्ष्यामि ते शृणु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस वन में रहते हुए उन महान पाण्डवों ने जो कष्ट सहे थे, उनका वर्णन मैं आगे चलकर उन्हें सुख देने वाला करूँगा, सुनो -॥7॥
 
Rajan! While living in that forest, I will describe the hardships that those great Pandavas had to face which would give them happiness in the future, listen -॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)