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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना
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श्लोक 19
श्लोक
3.311.19
शीतलच्छायमागम्य न्यग्रोधं गहने वने।
क्षुत्पिपासापरीताङ्गा: पाण्डवा: समुपाविशन्॥ १९॥
अनुवाद
तत्पश्चात्, भूख-प्यास से पीड़ित पाण्डव उस घने वन में आये और एक वट वृक्ष के पास शीतल छाया में बैठ गये।
Thereafter, the Pandavas, suffering from hunger and thirst, came to that dense forest and sat near a banyan tree having a cool shade.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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