श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 311: ब्राह्मणकी अरणि एवं मन्थन-काष्ठका पता लगानेके लिये पाण्डवोंका मृगके पीछे दौड़ना और दु:खी होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.311.11 
अजातशत्रुमासीनं भ्रातृभि: सहितं वने।
आगम्य ब्राह्मणस्तूर्णं संतप्तश्चेदमब्रवीत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह उत्तेजित ब्राह्मण तुरन्त ही वन में अपने भाइयों के साथ बैठे हुए अजातशत्रु युधिष्ठिर के पास आया और इस प्रकार बोला:-॥11॥
 
The agitated Brahmin immediately came to Ajatashatru Yudhishthira who was sitting with his brothers in the forest and said this: -॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)