Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.310.8: कर्ण ने उसे यथाशक्ति समझाया और विधिपूर्वक उसकी पूजा की, किन्तु उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कोई अन्य वरदान स्वीकार करने में अपनी अनिच्छा व्यक्त की। | mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सान्त्वितश्च यथाशक्ति पूजितश्च यथाविधि।
न चान्यं स द्विजश्रेष्ठ: कामयामास वै वरम्॥ ८॥
अनुवाद
कर्ण ने उसे यथाशक्ति समझाया और विधिपूर्वक उसकी पूजा की, किन्तु उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कोई अन्य वरदान स्वीकार करने में अपनी अनिच्छा व्यक्त की।
Karna explained to him as much as he could and worshipped him according to the rituals. However, that great Brahmin expressed his unwillingness to accept any other boon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥