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mahabharat 3.310.41: जनमेजय ने पूछा - हे प्रभु ! उन दिनों वे वीर पाण्डव कहाँ थे ? उन्होंने यह शुभ समाचार कैसे सुना और बारहवाँ वर्ष बीत जाने पर उन्होंने क्या किया ? ये सब बातें आप मुझे स्पष्ट रूप से बताएँ ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.310.41 
जनमेजय उवाच
क्वस्था वीरा: पाण्डवास्ते बभूवु:
कुतश्चैते श्रुतवन्त: प्रियं तत्।
किं वाकार्षुर्द्वादशेऽब्दे व्यतीते
तन्मे सर्वं भगवान् व्याकरोतु॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे प्रभु ! उन दिनों वे वीर पाण्डव कहाँ थे ? उन्होंने यह शुभ समाचार कैसे सुना और बारहवाँ वर्ष बीत जाने पर उन्होंने क्या किया ? ये सब बातें आप मुझे स्पष्ट रूप से बताएँ ॥ 41॥
 
Janamejaya asked - O Lord! Where were those brave Pandavas in those days? How did they hear the good news and what did they do after the twelfth year had passed? Please tell me all these things clearly. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)