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mahabharat 3.310.40: जब धृतराष्ट्र के पुत्रों ने सुना कि कर्ण से उसके कवच और कुण्डल छीन लिए गए हैं, तो वे सभी अत्यन्त दुःखी हुए और उनका अभिमान चूर-चूर हो गया। जब वन में रहने वाले कुंतीपुत्रों ने सुना कि एक सारथी का पुत्र इस अवस्था को प्राप्त हुआ है, तो वे अत्यन्त प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.310.40 
श्रुत्वा कर्णं मुषितं धार्तराष्ट्रा
दीना: सर्वे भग्नदर्पा इवासन्।
तां चावस्थां गमितं सूतपुत्रं
श्रुत्वा पार्था जहृषु: काननस्था:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जब धृतराष्ट्र के पुत्रों ने सुना कि कर्ण से उसके कवच और कुण्डल छीन लिए गए हैं, तो वे सभी अत्यन्त दुःखी हुए और उनका अभिमान चूर-चूर हो गया। जब वन में रहने वाले कुंतीपुत्रों ने सुना कि एक सारथी का पुत्र इस अवस्था को प्राप्त हुआ है, तो वे अत्यन्त प्रसन्न हुए।
 
When the sons of Dhritarashtra heard that Karna had been deprived of his armour and earrings, they all became very sad and their pride was shattered. When the sons of Kunti, who were living in the forest, heard that the son of a charioteer had reached this state, they were very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)