श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.310.4 
यदेतत् सहजं वर्म कुण्डले च तवानघ।
एतदुत्कृत्य मे देहि यदि सत्यव्रतो भवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे पापी! यदि तू सत्यवादी है तो अपने शरीर के साथ उत्पन्न हुए इन कवच और कुण्डलों को काटकर मुझे दे दे॥4॥
 
O sinful one! If you are a truthful person then cut off these armour and earrings that were born along with your body and give them to me. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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