Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.310.39: इस प्रकार कर्ण को कवच और कुण्डल से वंचित करके और संसार में उसकी कीर्ति फैलाकर देवराज इन्द्र मुस्कुराते हुए स्वर्गलोक को चले गए और उनके मन में यह विश्वास हो गया कि 'मैंने पाण्डवों का कार्य पूर्ण कर दिया है।'॥39॥ | mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार कर्ण को कवच और कुण्डल से वंचित करके और संसार में उसकी कीर्ति फैलाकर देवराज इन्द्र मुस्कुराते हुए स्वर्गलोक को चले गए और उनके मन में यह विश्वास हो गया कि 'मैंने पाण्डवों का कार्य पूर्ण कर दिया है।'॥39॥
Thus, having deprived Karna of his armour and earrings and having spread his fame in the world, Devraj Indra went to heaven smiling. He was convinced in his heart that 'I have completed the task of the Pandavas'.॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥