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mahabharat 3.310.37: कर्ण के शरीर के सभी अंग अस्त्रों से कट गए थे, फिर भी वह वीर बार-बार मुस्कुरा रहा था। यह देखकर दिव्य नगाड़े बजने लगे और आकाश से दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। 37।   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.310.37 
ततो दिव्या दुन्दुभय: प्रणेदु:
पपातोच्चै: पुष्पवर्षं च दिव्यम्।
दृष्ट्वा कर्णं शस्त्रसंकृत्तगात्रं
मुहुश्चापि स्मयमानं नृवीरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण के शरीर के सभी अंग अस्त्रों से कट गए थे, फिर भी वह वीर बार-बार मुस्कुरा रहा था। यह देखकर दिव्य नगाड़े बजने लगे और आकाश से दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी। 37।
 
All the body parts of Karna were cut by the weapons, yet the brave man was smiling again and again. Seeing this, divine drums started playing and divine flowers started raining from the sky. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)