श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.310.34 
कर्ण उवाच
संशयं परमं प्राप्य विमोक्ष्ये वासवीमिमाम्।
यथा मामात्थ शक्र त्वं सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा - देवेन्द्र! जैसा आप मुझे बता रहे हैं, मैं आपकी दी हुई इस शक्ति का प्रयोग तभी करूँगा जब मेरे प्राण संकट में होंगे, मैं आपसे सत्य कह रहा हूँ।
 
Karna said - Devendra! As you are telling me, I will use this power given by you only when my life is in danger, I am telling you the truth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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