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mahabharat 3.310.31: इन्द्र ने कहा - कर्ण ! तुम्हारा रूप किसी भी प्रकार कुरूप नहीं होगा। तुम्हारे शरीर पर कोई घाव भी नहीं होगा; क्योंकि तुम असत्य की इच्छा नहीं करते॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.310.31 
इन्द्र उवाच
न ते बीभत्सता कर्ण भविष्यति कथञ्चन।
व्रणश्चैव न गात्रेषु यस्त्वं नानृतमिच्छसि॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - कर्ण ! तुम्हारा रूप किसी भी प्रकार कुरूप नहीं होगा। तुम्हारे शरीर पर कोई घाव भी नहीं होगा; क्योंकि तुम असत्य की इच्छा नहीं करते॥31॥
 
Indra said - Karna! Your appearance will not be ugly in any way. There will not even be any wound on your body; because you do not desire untruth.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)