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श्लोक 3.310.31  |
इन्द्र उवाच
न ते बीभत्सता कर्ण भविष्यति कथञ्चन।
व्रणश्चैव न गात्रेषु यस्त्वं नानृतमिच्छसि॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| इन्द्र ने कहा - कर्ण ! तुम्हारा रूप किसी भी प्रकार कुरूप नहीं होगा। तुम्हारे शरीर पर कोई घाव भी नहीं होगा; क्योंकि तुम असत्य की इच्छा नहीं करते॥31॥ |
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| Indra said - Karna! Your appearance will not be ugly in any way. There will not even be any wound on your body; because you do not desire untruth.॥ 31॥ |
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