Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.310.30: मैं अपने शरीर से कवच और कुण्डल निकालकर तुम्हें दे दूँगी; परन्तु उस समय जब मेरे अंग कट जाएँ, तब मेरा रूप भयंकर न हो ॥30॥ | mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्कृत्य तु प्रदास्यामि कुण्डले कवचं च ते।
निकृत्तेषु तु गात्रेषु न मे बीभत्सता भवेत्॥ ३०॥
अनुवाद
मैं अपने शरीर से कवच और कुण्डल निकालकर तुम्हें दे दूँगी; परन्तु उस समय जब मेरे अंग कट जाएँ, तब मेरा रूप भयंकर न हो ॥30॥
I shall give you the armour and earrings after removing them from my body; but at that time my appearance should not be hideous when my limbs are cut off. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥