Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.310.26: कर्ण ने कहा - देवेन्द्र! महायुद्ध में मैं अपने एकमात्र शत्रु को इसी से मारना चाहता हूँ, जो बहुत गर्जना करता है, प्रतापी है और जो मुझे सदैव भयभीत रखता है॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्ण ने कहा - देवेन्द्र! महायुद्ध में मैं अपने एकमात्र शत्रु को इसी से मारना चाहता हूँ, जो बहुत गर्जना करता है, प्रतापी है और जो मुझे सदैव भयभीत रखता है॥ 26॥
Karna said - Devendra! In the great war I want to kill my only enemy with this one, who roars a lot and is majestic and who always keeps me afraid.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥