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mahabharat 3.310.25: वही शक्ति तुम्हारे हाथ में जाएगी और किसी तेजस्वी, बलवान, प्रतापी और गर्जने वाले शत्रु को मारकर पुनः मेरे पास लौट आएगी। ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.310.25 
सेयं तव करप्राप्ता हत्वैकं रिपुमूर्जितम्।
गर्जन्तं प्रतपन्तं च मामेवैष्यति सूतज॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वही शक्ति तुम्हारे हाथ में जाएगी और किसी तेजस्वी, बलवान, प्रतापी और गर्जने वाले शत्रु को मारकर पुनः मेरे पास लौट आएगी। ॥25॥
 
"That same power will go into your hands and after killing some brilliant, powerful, majestic and roaring enemy, it will return to me again." ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)