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mahabharat 3.310.23: कर्ण! अपने दोनों कुण्डल और सहज कवच मुझे दे दो और मेरी शक्ति स्वीकार करो। इस शर्त पर कि हम इन वस्तुओं का आदान-प्रदान कर लें॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.310.23 
कुण्डले मे प्रयच्छस्व वर्म चैव शरीरजम्।
गृहाण कर्ण शक्तिं त्वमनेन समयेन च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण! अपने दोनों कुण्डल और सहज कवच मुझे दे दो और मेरी शक्ति स्वीकार करो। इस शर्त पर कि हम इन वस्तुओं का आदान-प्रदान कर लें॥ 23॥
 
Karna! Give me your two earrings and Sahaj Kavach and accept my power. On this condition, we should exchange these things.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)