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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना
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श्लोक 22
श्लोक
3.310.22
तत: संचिन्त्य मनसा मुहूर्तमिव वासव:।
शक्त्यर्थं पृथिवीपाल कर्णं वाक्यमथाब्रवीत्॥ २२॥
अनुवाद
राजन! तब इन्द्र ने कुछ देर तक शक्ति के विषय में विचार किया और फिर कर्ण से इस प्रकार कहा - ॥22॥
King! Then Indra thought about Shakti for a while and then told Karna thus - ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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