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श्लोक 3.310.22  |
तत: संचिन्त्य मनसा मुहूर्तमिव वासव:।
शक्त्यर्थं पृथिवीपाल कर्णं वाक्यमथाब्रवीत्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! तब इन्द्र ने कुछ देर तक शक्ति के विषय में विचार किया और फिर कर्ण से इस प्रकार कहा - ॥22॥ |
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| King! Then Indra thought about Shakti for a while and then told Karna thus - ॥22॥ |
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