श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.310.20 
वैशम्पायन उवाच
तत: कर्ण: प्रहृष्टस्तु उपसंगम्य वासवम्।
अमोघां शक्तिमभ्येत्य वव्रे सम्पूर्णमानस:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तब कर्ण अत्यन्त प्रसन्न होकर देवराज इन्द्र के पास गया और उनकी मनोकामना पूर्ण करके उनसे उनकी अमोघ शक्ति माँगी।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Then Karna became very happy and went to Devraja Indra and after fulfilling his wishes he asked for his infallible power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)