श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.310.2 
हिरण्यकण्ठी: प्रमदा ग्रामान् वा बहुगोकुलान्।
किं ददानीति तं विप्रमुवाचाधिरथिस्तत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब अधिरथपुत्र ने ब्राह्मणवेशधारी इन्द्र से कहा, 'हे ब्राह्मण! मैं तुम्हें क्या दूँ? स्वर्णमयी कंठ वाली युवतियाँ या बहुत से पशुओं से भरे हुए बहुत से गाँव?'॥2॥
 
Then Adhiratha's son said to Indra who was in the guise of a Brahmin, 'O Brahmin! What should I give you? Young women adorned with golden necks or many villages filled with a large number of cattle?'॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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