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mahabharat 3.310.18: इन्द्र ने कहा- कर्ण! मेरे तुम्हारे पास आने से पहले ही सूर्यदेव को यह बात ज्ञात हो चुकी थी। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने स्वयं ही तुम्हें सब कुछ बता दिया है॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.310.18 
शक्र उवाच
विदितोऽहं रवे: पूर्वमायानेव तवान्तिकम्।
तेन ते सर्वमाख्यातमेवमेतन्न संशय:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा- कर्ण! मेरे तुम्हारे पास आने से पहले ही सूर्यदेव को यह बात ज्ञात हो चुकी थी। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने स्वयं ही तुम्हें सब कुछ बता दिया है॥ 18॥
 
Indra said- Karna! Before I was coming to you, the Sun God had already come to know about this. There is no doubt that he himself has told you everything.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)