Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.310.14: 'देवदेवेश्वर! प्रभु! मुझे पहले से ही मालूम था कि आप आ रहे हैं। परंतु देवेन्द्र! आपको निष्फल करना उचित नहीं है।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.310.14 
विदितो देवदेवेश प्रागेवासि मम प्रभो।
न तु न्याय्यं मया दातुुं तव शक्र वृथा वरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'देवदेवेश्वर! प्रभु! मुझे पहले से ही मालूम था कि आप आ रहे हैं। परंतु देवेन्द्र! आपको निष्फल करना उचित नहीं है।॥14॥
 
‘Devdeveshwar! Prabhu! I already knew that you are coming. But Devendra! It is not fair that I make you fruitless.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)