vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना
»
श्लोक 11
श्लोक
3.310.11
विशालं पृथिवीराज्यं क्षेमं निहतकण्टकम्।
प्रतिगृह्णीष्व मत्तस्त्वं साधु ब्राह्मणपुङ्गव॥ ११॥
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! आप कृपा करके मुझसे सम्पूर्ण पृथ्वी का यह शुभ, अबाधित, विशाल और उत्तम साम्राज्य ले लीजिए।' 11.
O great Brahmin! Please take from me this auspicious, uninterrupted, vast and excellent empire of the whole earth.' 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×