Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.310.10: हे ब्राह्मण! कवच मेरे शरीर के साथ ही उत्पन्न हुआ है और दोनों कुण्डल भी अमृत से उत्पन्न हुए हैं। इनके कारण मैं इस संसार में अविनाशी हूँ; अतः मैं इन सब वस्तुओं का त्याग नहीं कर सकता॥ 10॥ | mahabharat अध्याय 3.310: इन्द्रका कर्णको अमोघ शक्ति देकर बदलेमें उसके कवच-कुण्डल लेना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! कवच मेरे शरीर के साथ ही उत्पन्न हुआ है और दोनों कुण्डल भी अमृत से उत्पन्न हुए हैं। इनके कारण मैं इस संसार में अविनाशी हूँ; अतः मैं इन सब वस्तुओं का त्याग नहीं कर सकता॥ 10॥
‘O Brahmin! The armor was born along with my body and both the earrings were also born out of nectar. Due to these, I am indestructible in this world; hence I cannot give up all these things.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥