Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.31.8: जो धर्म के विषय में संशय करता है अथवा जो दुर्बल मनवाला मनुष्य वेद आदि शास्त्रों पर अविश्वास करता है, वह वृद्धावस्था और मृत्यु से रहित परमधाम से उसी प्रकार वंचित रहता है, जैसे शूद्र वेदों के अध्ययन से वंचित रहता है। ॥8॥ | mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मो यस्याभिशङ्क्य: स्यादार्षं वा दुर्बलात्मन:।
वेदाच्छूद्र इवापेयात् स लोकादजरामरात्॥ ८॥
अनुवाद
जो धर्म के विषय में संशय करता है अथवा जो दुर्बल मनवाला मनुष्य वेद आदि शास्त्रों पर अविश्वास करता है, वह वृद्धावस्था और मृत्यु से रहित परमधाम से उसी प्रकार वंचित रहता है, जैसे शूद्र वेदों के अध्ययन से वंचित रहता है। ॥8॥
He who has doubts regarding religion or a weak-souled person who disbelieves in the Vedas and other scriptures, remains deprived of the Supreme Abode which is free from old age and death, just as a Shudra is deprived of the study of the Vedas. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥