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mahabharat 3.31.7: मैं यह बात सब प्रमाणों से ऊपर उठकर तथा केवल शास्त्रों के आधार पर जोर देकर कह रहा हूँ कि तुम धर्म पर संदेह मत करो; क्योंकि जो व्यक्ति धर्म पर संदेह करता है, वह पशु-पक्षियों की योनि में जन्म लेता है।   |   mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.31.7 
अतिवादाद् वदाम्येष मा धर्ममभिशङ्किथा:।
धर्माभिशङ्की पुरुषस्तिर्यग्गतिपरायण:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं यह बात सब प्रमाणों से ऊपर उठकर तथा केवल शास्त्रों के आधार पर जोर देकर कह रहा हूँ कि तुम धर्म पर संदेह मत करो; क्योंकि जो व्यक्ति धर्म पर संदेह करता है, वह पशु-पक्षियों की योनि में जन्म लेता है।
 
I am saying this emphatically, rising above all evidence and only on the basis of scriptures, that you should not doubt religion; because a person who doubts religion is born in the womb of animals and birds. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)