Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.31.42: हे कृष्ण! तुम्हें किसी भी प्रकार से उस परमेश्वर का अनादर नहीं करना चाहिए, जिनकी कृपा से भक्ति करने वाला मरणशील मनुष्य अमरत्व को प्राप्त होता है। 42॥ | mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कृष्ण! तुम्हें किसी भी प्रकार से उस परमेश्वर का अनादर नहीं करना चाहिए, जिनकी कृपा से भक्ति करने वाला मरणशील मनुष्य अमरत्व को प्राप्त होता है। 42॥
Krishna! You should not in any way disrespect the Supreme God, by whose grace a mortal man who has devotion towards him attains immortality. 42॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें युधिष्ठिरवाक्यविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥