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mahabharat 3.31.41: और जो ईश्वर सब जीवों का पालन-पोषण करते हैं, उन्हें दोष मत दो। शास्त्रों और अपने बड़ों की शिक्षा के अनुसार ईश्वर को समझने का प्रयत्न करो और उन्हें प्रणाम करो। तुम्हारी बुद्धि आज जैसी है वैसी न रहे। ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.31.41 
ईश्वरं चापि भूतानां धातारं मा च वै क्षिप।
शिक्षस्वैनं नमस्वैनं मा तेऽभूद् बुद्धिरीदृशी॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
और जो ईश्वर सब जीवों का पालन-पोषण करते हैं, उन्हें दोष मत दो। शास्त्रों और अपने बड़ों की शिक्षा के अनुसार ईश्वर को समझने का प्रयत्न करो और उन्हें प्रणाम करो। तुम्हारी बुद्धि आज जैसी है वैसी न रहे। ॥41॥
 
And do not blame God who provides for all living beings. Try to understand God according to the teachings of the scriptures and your elders and bow to Him. Your intellect should not remain the same as it is today. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)