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mahabharat 3.31.36: देवताओं को गुप्त रहने वाले इन विषयों में सामान्य मनुष्य भ्रमित हो जाते हैं। जो इन सबको तत्व से नहीं जानता, वह हजारों कल्पों में भी कल्याण प्राप्त नहीं कर सकता ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.31.36 
नैतानि वेद य: कश्चिन्मुह्यन्तेऽत्र प्रजा इमा:।
अपि कल्पसहस्रेण न स श्रेयोऽधिगच्छति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को गुप्त रहने वाले इन विषयों में सामान्य मनुष्य भ्रमित हो जाते हैं। जो इन सबको तत्व से नहीं जानता, वह हजारों कल्पों में भी कल्याण प्राप्त नहीं कर सकता ॥ 36॥
 
Ordinary people get confused in these subjects which are secret to the Gods. He who does not know all these in essence cannot attain welfare even in thousands of kalpas. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)