Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.31.35: भामिनी! वेदों में वर्णित शुभ कर्मों को देने वाले तथा घात करने वाले पाप कर्मों का फल, उत्पत्ति और विनाश - ये सब दिव्य रहस्य हैं (इन्हें केवल देवता ही जानते हैं)। 35॥ | mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्मणां श्रुतपुण्यानां पापानां च फलोदय:।
प्रभवश्चात्ययश्चैव देवगुह्यानि भाविनि॥ ३५॥
अनुवाद
भामिनी! वेदों में वर्णित शुभ कर्मों को देने वाले तथा घात करने वाले पाप कर्मों का फल, उत्पत्ति और विनाश - ये सब दिव्य रहस्य हैं (इन्हें केवल देवता ही जानते हैं)। 35॥
Bhamini! The fruition, origin and annihilation of the good deeds that give good deeds and the harmful sinful deeds mentioned in the Vedas - all these are divine secrets (only the gods know them). 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥