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mahabharat 3.31.25: हे साधु द्रौपदी! यदि पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा किया गया धर्म निष्फल होता, तो यह सारा जगत् अनन्त अंधकार में डूब जाता॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.31.25 
अफलो यदि धर्म: स्याच्चरितो धर्मचारिभि:।
अप्रतिष्ठे तमस्येतज्जगन्मज्जेदनिन्दिते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे साधु द्रौपदी! यदि पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा किया गया धर्म निष्फल होता, तो यह सारा जगत् अनन्त अंधकार में डूब जाता॥ 25॥
 
O saintly Draupadi! If the Dharma practised by pious men had been fruitless, the entire world would have been engulfed in infinite darkness.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)