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mahabharat 3.31.19: जो मूर्ख प्रमाण से विमुख हो जाता है, वेद-शास्त्रों के सिद्धान्तों की निन्दा करता है, तथा काम और लोभ में अत्यन्त आसक्त रहता है, वह नरक में जाता है ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.31.19 
प्रमाणाद्धि निवृत्तो हि वेदशास्त्रार्थनिन्दक:।
कामलोभातिगो मूढो नरकं प्रतिपद्यते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख प्रमाण से विमुख हो जाता है, वेद-शास्त्रों के सिद्धान्तों की निन्दा करता है, तथा काम और लोभ में अत्यन्त आसक्त रहता है, वह नरक में जाता है ॥19॥
 
The fool who turns away from evidence, criticises the principles of the Vedas and scriptures, and is deeply devoted to lust and greed, goes to hell. ॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)