Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.31.11: तुमने अभी-अभी यहाँ से विदा हुए महातपस्वी मार्कण्डेय को बड़ी भक्ति से देखा है। उन्होंने धर्म के मार्ग पर चलकर अमरत्व प्राप्त किया है।॥11॥ | mahabharat अध्याय 3.31: युधिष्ठिरद्वारा द्रौपदीके आक्षेपका समाधान तथा ईश्वर, धर्म और महापुरुषोंके आदरसे लाभ और अनादरसे हानि । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रत्यक्षं हि त्वया दृष्ट ऋषिर्गच्छन् महातपा:।
मार्कण्डेयोऽप्रमेयात्मा धर्मेण चिरजीविता॥ ११॥
अनुवाद
तुमने अभी-अभी यहाँ से विदा हुए महातपस्वी मार्कण्डेय को बड़ी भक्ति से देखा है। उन्होंने धर्म के मार्ग पर चलकर अमरत्व प्राप्त किया है।॥11॥
You have seen the great ascetic Markandeya, who has just left from here, with great devotion. He has attained immortality by following the path of Dharma. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥