Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.309.9: भीरु! भाविनी! जिस दिन से मैं पैदा हुआ हूँ, आज का दिन है जब से मैंने ऐसा अद्भुत बालक देखा है। मैं सोचता हूँ कि यह दिव्य बालक हमें संयोग से ही मिला है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.309.9 
इदमत्यद्‍भुतं भीरु यतो जातोऽस्मि भाविनि।
दृष्टवान् देवगर्भोऽयं मन्येऽस्माकमुपागत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीरु! भाविनी! जिस दिन से मैं पैदा हुआ हूँ, आज का दिन है जब से मैंने ऐसा अद्भुत बालक देखा है। मैं सोचता हूँ कि यह दिव्य बालक हमें संयोग से ही मिला है।॥9॥
 
Bhiru! Bhavini! Since the day I was born, today is the day I have seen such a wonderful child. I think that we have got this divine child by chance.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)