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mahabharat 3.309.4: टोकरी की रक्षा के लिए उसके चारों ओर एक लता लपेटी हुई थी और उस पर लगे सिंदूर के लेप के कारण वह बहुत सुंदर लग रही थी। गंगा की लहरों से टकराकर टोकरी किनारे पर आ गई।   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.309.4 
दत्तरक्षाप्रतिसरामन्वालम्भनशोभनाम्।
ऊर्मीतरङ्गैर्जाह्नव्या: समानीतामुपह्वरम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
टोकरी की रक्षा के लिए उसके चारों ओर एक लता लपेटी हुई थी और उस पर लगे सिंदूर के लेप के कारण वह बहुत सुंदर लग रही थी। गंगा की लहरों से टकराकर टोकरी किनारे पर आ गई।
 
A creeper had been wrapped around the basket to protect it and it was looking very beautiful because of the vermilion paste applied on it. After being thrashed by the waves of the Ganges, the basket came near the shore.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)