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mahabharat 3.309.25: उसी समय इन्द्र भी ब्राह्मण का वेश धारण करके वहाँ प्रकट हुए और बोले, ‘मुझे भिक्षा दीजिए।’ यह सुनकर राधानन्दन कर्ण ने कहा, ‘हे ब्राह्मण! आपका स्वागत है।’   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.309.25 
तमिन्द्रो ब्राह्मणो भूत्वा भिक्षां देहीत्युपस्थित:।
स्वागतं चेति राधेयस्तमथ प्रत्यभाषत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उसी समय इन्द्र भी ब्राह्मण का वेश धारण करके वहाँ प्रकट हुए और बोले, ‘मुझे भिक्षा दीजिए।’ यह सुनकर राधानन्दन कर्ण ने कहा, ‘हे ब्राह्मण! आपका स्वागत है।’
 
At that very moment Indra also appeared there in the guise of a Brahmin and said, 'Give me alms.' On hearing this Radhanandan Karna replied, 'O Brahmin! You are most welcome.'
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि कुण्डलाहरणपर्वणि राधाकर्णप्राप्तौ नवाधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत कुण्डलाहरणपर्वमें राधाको कर्णकी प्राप्तिविषयक तीन सौ नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २५ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)