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mahabharat 3.309.23-24: राजा! जब कर्ण दोपहर के समय जल में खड़े होकर हाथ जोड़कर सूर्यदेव की आराधना करते थे, तब अनेक ब्राह्मण उनसे धन मांगने आते थे। उस समय उनके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं थी जो ब्राह्मणों को न दी जा सके।   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.309.23-24 
यदा च कर्णो राजेन्द्र भानुमन्तं दिवाकरम्।
स्तौति मध्यन्दिने प्राप्ते प्राञ्जलि: सलिले स्थित:॥ २३॥
तत्रैनमुपतिष्ठन्ति ब्राह्मणा धनहेतुना।
नादेयं तस्य तत्काले किञ्चिदस्ति द्विजातिषु॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा! जब कर्ण दोपहर के समय जल में खड़े होकर हाथ जोड़कर सूर्यदेव की आराधना करते थे, तब अनेक ब्राह्मण उनसे धन मांगने आते थे। उस समय उनके पास ऐसी कोई वस्तु नहीं थी जो ब्राह्मणों को न दी जा सके।
 
King! When Karna stood in the water at noon and with folded hands used to pray to Lord Sun, many Brahmins used to come to him for money. At that time he did not have any thing which was not payable to Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)