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mahabharat 3.309.21: महाराज! यह निःसंदेह सूर्य का रहस्य है कि कुन्ती के गर्भ से उत्पन्न कर्ण का पालन-पोषण सूत कुल में हुआ।   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.309.21 
एतद् गुह्यं महाराज सूर्यस्यासीन्न संशय:।
य: सूर्यसम्भव: कर्ण: कुन्त्यां सूतकुले तथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह निःसंदेह सूर्य का रहस्य है कि कुन्ती के गर्भ से उत्पन्न कर्ण का पालन-पोषण सूत कुल में हुआ।
 
Maharaj! This is undoubtedly the secret of the Sun that Karna, born from Kunti's womb, was raised in the Sut clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)