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mahabharat 3.309.17: वहाँ उन्होंने धनुर्वेद सीखने के लिए आचार्य द्रोण का शिष्यत्व स्वीकार किया। इस प्रकार पराक्रमी कर्ण की दुर्योधन से मित्रता हो गई।   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.309.17 
तत्रोपसदनं चक्रे द्रोणस्येष्वस्त्रकर्मणि।
सख्यं दुर्योधनेनैवमगमत् स च वीर्यवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उन्होंने धनुर्वेद सीखने के लिए आचार्य द्रोण का शिष्यत्व स्वीकार किया। इस प्रकार पराक्रमी कर्ण की दुर्योधन से मित्रता हो गई।
 
There he accepted the discipleship of Acharya Drona to learn Dhanurveda. In this way the valiant Karna became friends with Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)