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mahabharat 3.309.11-d1h: राधा ने भी उस दिव्य बालक को स्वीकार किया जो कमल के भीतरी भाग के समान तेजस्वी, सुन्दर और दिव्य स्वरूप वाला था। निश्चय ही ईश्वरीय प्रेरणा से राधा के स्तनों से भी दूध बहने लगा। 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 11-d1h
 
 
श्लोक  3.309.11-d1h 
प्रतिजग्राह तं राधा विधिवद् दिव्यरूपिणम्।
पुत्रं कमलगर्भाभं देवगर्भं श्रिया वृतम्॥ ११॥
(स्तन्यं समास्रवच्चास्या दैवादित्यथ निश्चय:।)
 
 
अनुवाद
राधा ने भी उस दिव्य बालक को स्वीकार किया जो कमल के भीतरी भाग के समान तेजस्वी, सुन्दर और दिव्य स्वरूप वाला था। निश्चय ही ईश्वरीय प्रेरणा से राधा के स्तनों से भी दूध बहने लगा। 11॥
 
Radha also accepted that divine child who was as bright, beautiful and divine in form as the inner part of a lotus. Certainly, due to divine inspiration, milk also started flowing from Radha's breasts. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)