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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 309: अधिरथ सूत तथा उसकी पत्नी राधाको बालक कर्णकी प्राप्ति, राधाके द्वारा उसका पालन, हस्तिनापुरमें उसकी शिक्षा-दीक्षा तथा कर्णके पास इन्द्रका आगमन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.309.1 
वैशम्पायन उवाच
एतस्मिन्नेव काले तु धृतराष्ट्रस्य वै सखा।
सूतोऽधिरथ इत्येव सदारो जाह्नवीं ययौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! इसी समय राजा धृतराष्ट्र के मित्र सूत अधिरथ अपनी पत्नी सहित गंगा तट पर आये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! At this very time, the friend of King Dhritarashtra, Suta Adhiratha, arrived at the bank of the Ganges with his wife.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)